गमला फूलो वाला ला...कविता-

ग्राम-नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से जया बुनकर एक कविता सुनवा रही हैं:
गमला फूलो वाला ला-
अपना घर आंगन महकाओ-
घर से पानी लेकर आओ-
पौधे की तुम प्यास बुझाव-
मछली देखो आओ आओ-
रस्सी कूदो नाचो गाओ... (AR)

Posted on: Jul 06, 2020. Tags: CG MUNGELI NEHA BUNKAR POEM

मुश्किल बड़ी घड़ी है सैयम बनाये रखना है...कोरोना पर संदेश-

ग्राम-नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से अनुराधा बुनकर कोरोना पर संदेश दे रही हैं:
दुनिया भर में वैश्विक महामारी बनकर फैली कोरोना वायरस का प्रकोप दिनो दिन बढ़ता जा रहा है, देश में लॉकडाउन लगा है, मरीजो को संख्या बढ़ती जा रही है, इससे बचाव के लिये घरो में ही रहना है|
मुश्किल बड़ी घड़ी है सैयम बनाये रखना है-
एक फासला बनाकर-
खुद को बचाये रखना है... (AR)

Posted on: Jul 04, 2020. Tags: ANURADHA BUNKAR CG CORONA MESSAGE MUNGELI

कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में...कविता-

नवलपुर, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से नेहा बुनकर एक कविता सुना रही हैं, जिसका शीर्षक है : ज़िंदगी के मैदानों में :
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में-
बहुत कोशिश करते हैं जो खुद का वजूद बनाने की-
हो जाते हैं अपनों से दूर नजर आते हैं बेगानों में-
हस्ती नहीं रहती दुनिया में एक लंबे दौर तक-
आंखिर में जगह मिलती है कहीं दूर श्मसानों में-
कहां मिलता है चैन पत्थर के इन मकानों में... (AR)

Posted on: Jun 27, 2020. Tags: CG MUNGELI NEHA BUNKAR POEM

हिंदी को बनवास दे अंग्रेजी को राज्य...हिंदी भाषा को लेकर कविता-

ग्राम-नवलपुर ब्लॉक-लोरमी जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से दुबेन्द्र बुनकर हमारे सीजीनेट सुनने वाले श्रोताओं को मात्र भाषा हिंदी को लेकर पंक्तियाँ सुना रहे है:
हिंदी को बनवास दे अंग्रेजी को राज्य-
हमने 70 सालों में कैसे गढ़ा समाज-
हिंदी हिन्दुस्तान में हुई सेविका आज-
पटरानी बनकर यहां अंग्रेजी करती राज-
हिंदी में है चेतना हिंदी में है प्राण-
हिंदी में है देश का स्वाभिमान सम्मान CS

Posted on: Jun 26, 2020. Tags: DUBENDR BUNKAR KAVITA LORMI MUNGELI CG

छा गयी मायूसी हर गलियाँ हर चौबारे पर...नशा मुक्ति कविता-

ग्राम-नवलपुर, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से अनुराधा बुनकर एक नशा मुक्ति कविता सुना रही हैं:
छा गयी मायूसी हर गलियाँ हर चौबारे पर-
लोगो ने अपने हालत बदल डाले-
नशे की पड़ी एसी आदत इनको-
जीने के अपने अंदाज बदल डाले-
दे रहा है भारत अपनी तरक्की की मिशले-
युवा कर कर नशे का व्यापार-
लुप्त हो संस्कृति हमारी, जिसका था हमें गुमान... (AR)

Posted on: Jun 26, 2020. Tags: ANURADHA BUNKAR CG MUNGELI POEM

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