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डोम समुदाय का पारंपरिक लोकनृत्य डोमकच उनके सुख-दुःख, नोंक-झोक की कहानी बताता है...

पियरगांव, जिला-मुज़फ्फरपुर (बिहार) से ब्रम्हानंद ठाकुर एक लोकनृत्य डोमकच के बारे में बता रहे हैं : डोमकच एक लोकनृत्य है और अपने कई संदेशो को समेटे है वर्तमान समय में ये बहुत कम देखने को मिलता है ये बता रहे हैं जब गाँव से बारात निकती है और घर सूना हो जाता है उस समय महिलाएं टोले में घूम घूम कर डोमकच गीत गाती हैं इस गीत में एक डोमिन और डोम की कहानी है जिसमे एक डोमिन अनारवती की शादी के बाद उसका डोम कमाने के लिए चला जाता है तब डोमिन अकेली रह जाती है और गाँव मे काम कर अपना गुजारा करती है कुछ दिनों बाद जब डोम वापस आता है कपडे, गहने लेकर, उस समय उनमे कुछ नोंक-झोंक भी होती हो है इसी पर आधारित ये नृत्य है | ब्रम्हानंद ठाकुर@9308571702.

Posted on: Nov 22, 2017. Tags: BRAMHANAND THAKUR

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