कई कंपनियां कर्मचरियों को बिना वेतन और हिसाब दिए निकाल देती है, अधिकारी मदद नहीं करते...

रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा बता रहे हैं कि 22 अगस्त 2017 को कुन्ती बाई, बेलबती, अनूपा के अतरिक्त दो लोगो को विजय प्रथमिसन प्राइवेट लिमिटेड कन्हेरा उर्ला में अवैधानिक तरीके से काम से निकल दिया गया और उसका हिसाब भी नही दिया गया| उन्होंने हिसाब दिलाने के लिए सहायक श्रमआयुक्त रायपुर में 6माह पूर्व आवेदन दिया था, दूसरा मामला विजय मल्होत्रा और रामचंदर सहानी का जिसमे दोनों ने रघुवीर प्राइवेट लिमिटेड में काम किया, जिसका 1 महीने का वेतन और हिसाब दिए बगैर अवैधानिक तरीके से छटनी कर निकाल दिया गया| उन्होंने 7 सितम्बर 2017 को आवेदन दिया था लेकिन दोनों मामलों पर अभी तक कोई कारवाही नही हो रही है इसलिए वे सीजीनेट के संथियो से अपील कर रहे हैं कि दिए गए नंबर पर कार्यालय अधिकारी से बात कर निवेदन करे जिससे उन कर्मचरियों का वेतन और हिसाब मिल सके| सहायक श्रमआयुक्त@9407904724. भागीरथी वर्मा@7354216306

Posted on: Feb 27, 2018. Tags: BHAGIRATHI VARMA

जो डरते है सत्य बोलने से...कविता

भागीरथी वर्मा, जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़) से एक कविता सुना रहे है:
जो डरते है सत्य बोलने से-
डरते है अधिकार मांगने से-
डरते है अन्याय के खिलाफ-
आवाज उठाने से-
वो आदमी नहीं मुर्दे है-
जो अपना स्वाभिमान को कुचलते है-
अहसाय को मदद नहीं करते है-
जो सुकून के गुलाम बन जाते है-
वो आदमी नहीं मुर्दे है...

Posted on: Jan 30, 2018. Tags: BHAGIRATHI VARMA

झोला छाप डॉक्टरों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पाबन्दी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध...

जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा झोला छाप डॉक्टरों पर रोक लगाए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध कर रहे हैं. वे कह रहे हैं बड़े-बड़े डॉक्टर मोटी फ़ीस लेकर लोगो का इलाज़ करते है कभी गाँव में भ्रमण नही करते. ग्रामीण लोगो को दूर दराज़ से शहर आना पड़ता है जिससे लोगो को आर्थिक हानि भी होती है. झोला लेकर घूमने वाले डॉक्टर ही गाँव की जनता के काम आते है जो गाँव-गाँव झोला लेकर कम पैसे में इलाज़ करते है. वे आरोप लगा रहे हैं कि इस फैसले के पीछे व्यापारी डाक्टरों की लाबी का हाथ है जिनका गाँव के गरीबों से कोई वास्ता नहीं है. माननीय सर्वोच्य न्यायलय को फैसले पर पुनर्विचार कर पाबन्दी हटाना चाहिए. वर्मा@9039142049,

Posted on: Mar 24, 2017. Tags: BHAGIRATHI VARMA

भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था...कविता

भागीरथी वर्मा, रायपुर, छतीसगढ़ से हैं. छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभी हाल ही में वीर नारायण सिंह का शहादत दिवस मनाया गया है. उसी सन्दर्भ में एक कविता का प्रस्तुत कर रहे हैं:
छतीसगढ़ के सोनाखान में, इंक़लाब का बिगुल बजाया था
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था
सन 1856 के अकाल में
भूख से बिलखते, गरीब-किसानों के जीवन की रक्षा में
अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चलाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
सोये हुए आदिवासियों को, उस वीर ने जगाया था
बेईमानों को ललकारा था
ऐ लुटेरे ! तू खाली हाथ आया है, अब खाली हाथ ही जाएगा
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
जन आंदोलन देखकर, मक्कारों ने घबराया था
राजद्रोही बनाकर उस वीर को, जेल में ठूंसवाया था
जल्लाद अंग्रेज ने भी उस वीर के साथ, कैसा दुर्व्यवहार रचाया था
बीसों नाख़ून खींचकर, उँगलियों को लहू-लुहान बनाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
10-दिसंबर-1857 का, वह मनहूस दिन भी आया था
देश के गद्दारों ने जयस्तंभ चौक पे, उस वीर को फांसी पर लटकाया था
उस वीर के शहीद होने से, छत्तीसगढ़ के धरती में मातम सा पसराया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...

Posted on: Dec 15, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

अधिकतर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं...एक कविता

जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा जी, जो एक मजदूर हैं साओजी भाई ढ़ोलकिया पर एक एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं जिन्होंने इस बार दीवाली में अपने कर्मचारियों को खूब बोनस बांटा है और हाल में अखबारों में छाए रहे हैं :
चौथी पढ़े साओजी भाई ढ़ोलकिया का, दरिया दिल का क्या कहना
शायद यूनिवर्सिटी में पढ़कर आता, तो मैं इतना बोनस नहीं बाँट पाता
मै जो हूँ, कर्मचारियों के मेहनत से, ऐसे में मुनाफा अकेले कैसे पचा पाते
प्यारे-बेचारे अपने कर्मचारियों के बोनस में, फ्लैट-कार और हीरे के आभूषण बाँटे
ऐसा मुझे लगता है, ऐसा मुझे लगता है
अधिकतर यूनिवर्सिटी में, पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं
मजदूरों की गाढ़ी कमाई, अकेले ही डकार जाते हैं...

Posted on: Oct 27, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

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