5.6.31 Welcome to CGNet Swara

झोला छाप डॉक्टरों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पाबन्दी लगाने के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध...

जिला-रायपुर (छत्तीसगढ़) से भागीरथी वर्मा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा झोला छाप डॉक्टरों पर रोक लगाए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध कर रहे हैं. वे कह रहे हैं बड़े-बड़े डॉक्टर मोटी फ़ीस लेकर लोगो का इलाज़ करते है कभी गाँव में भ्रमण नही करते. ग्रामीण लोगो को दूर दराज़ से शहर आना पड़ता है जिससे लोगो को आर्थिक हानि भी होती है. झोला लेकर घूमने वाले डॉक्टर ही गाँव की जनता के काम आते है जो गाँव-गाँव झोला लेकर कम पैसे में इलाज़ करते है. वे आरोप लगा रहे हैं कि इस फैसले के पीछे व्यापारी डाक्टरों की लाबी का हाथ है जिनका गाँव के गरीबों से कोई वास्ता नहीं है. माननीय सर्वोच्य न्यायलय को फैसले पर पुनर्विचार कर पाबन्दी हटाना चाहिए. वर्मा@9039142049,

Posted on: Mar 24, 2017. Tags: BHAGIRATHI VARMA

कितना शर्म की बात है....कविता

रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
मुट्ठीभर लोग कुर्सी पर बैठकर-
देश में असहिष्णुता फैला रहे हैं-
गोमांस, सांप्रदायिक सौहार्द्र की बात करते हैं-
शिक्षा के भगवाकरण पर जोर दे रहे हैं-
अपना वेतन ढाई लाख और देश का विकास करने वाले-
मजदूरों का वेतन पांच हजार लगा रहे हैं-
कितना शर्म की बात है-
और तो और छत्तीसगढ़ की जनता को अनपढ़ रहने के लिए-
तीन हजार स्कूल बंद कर दिए-
आज की सरकार से अच्छा तो अंग्रेज था-
जो जनता को शिक्षित करने खातिर स्कूल खोला था-
जनता का शोषण करने आप अंग्रेज से भी आगे निकल गए-
वक्त है संभल जाओ ! नहीं तो आपका भी वही दुर्दशा होगा-
जो वर्षों पहले अंग्रेज का हुआ था-
अंग्रेज भी गोले बन्दूक पर विश्वास करते थे-
और आप भी गोली-बन्दूक पर विश्वास करते हैं-
आज समय है देशवासियों के लिए ऊँचा सोचने का-
समस्या का समाधान करने का न कि फूट डालो और राज करने का...

Posted on: Dec 15, 2015. Tags: Bhagirathi Verma

भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था...कविता

भागीरथी वर्मा, रायपुर, छतीसगढ़ से हैं. छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभी हाल ही में वीर नारायण सिंह का शहादत दिवस मनाया गया है. उसी सन्दर्भ में एक कविता का प्रस्तुत कर रहे हैं:
छतीसगढ़ के सोनाखान में, इंक़लाब का बिगुल बजाया था
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था
सन 1856 के अकाल में
भूख से बिलखते, गरीब-किसानों के जीवन की रक्षा में
अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चलाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
सोये हुए आदिवासियों को, उस वीर ने जगाया था
बेईमानों को ललकारा था
ऐ लुटेरे ! तू खाली हाथ आया है, अब खाली हाथ ही जाएगा
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
जन आंदोलन देखकर, मक्कारों ने घबराया था
राजद्रोही बनाकर उस वीर को, जेल में ठूंसवाया था
जल्लाद अंग्रेज ने भी उस वीर के साथ, कैसा दुर्व्यवहार रचाया था
बीसों नाख़ून खींचकर, उँगलियों को लहू-लुहान बनाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
10-दिसंबर-1857 का, वह मनहूस दिन भी आया था
देश के गद्दारों ने जयस्तंभ चौक पे, उस वीर को फांसी पर लटकाया था
उस वीर के शहीद होने से, छत्तीसगढ़ के धरती में मातम सा पसराया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...

Posted on: Dec 15, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

अधिकतर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं...एक कविता

जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा जी, जो एक मजदूर हैं साओजी भाई ढ़ोलकिया पर एक एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं जिन्होंने इस बार दीवाली में अपने कर्मचारियों को खूब बोनस बांटा है और हाल में अखबारों में छाए रहे हैं :
चौथी पढ़े साओजी भाई ढ़ोलकिया का, दरिया दिल का क्या कहना
शायद यूनिवर्सिटी में पढ़कर आता, तो मैं इतना बोनस नहीं बाँट पाता
मै जो हूँ, कर्मचारियों के मेहनत से, ऐसे में मुनाफा अकेले कैसे पचा पाते
प्यारे-बेचारे अपने कर्मचारियों के बोनस में, फ्लैट-कार और हीरे के आभूषण बाँटे
ऐसा मुझे लगता है, ऐसा मुझे लगता है
अधिकतर यूनिवर्सिटी में, पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं
मजदूरों की गाढ़ी कमाई, अकेले ही डकार जाते हैं...

Posted on: Oct 27, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

छत्तीसगढ़ की धरती में लाल-हरा का झंडा लहराया था...शंकर गुहा नियोगी पर कविता

क्रांतिकारी शंकर गुहा नियोगी की शहादत दिवस मनाते हुए रायपुर, छत्तीसगढ़ से साथी भागीरथी वर्मा उन पर लिखी एक कविता सुना रहे हैं:
छत्तीसगढ़ की धरती में लाल-हरा का झंडा लहराया था
मजदूर-किसानों के लिए वो वीर नियोगी था जिसने अपना खून बहाया था
छत्तीसगढ़ की धरती में...
सोये हुए मज़दूर-किसानों को वो वीर ने जगाया था
बेईमानों को ललकारा था, खाली हाँथ आया है तू खाली हाँथ जाएगा
छत्तीसगढ़ की धरती में.…
जन-आन्दोलन देखकर मक्कारों ने घबराया था
राज-द्रोही बनाकर उस वीर को जेलों में ठुसवाया था
छत्तीसगढ़ की धरती में.…
जल्लाद जेलर ने भी उस वीर के साथ कैसा दुर्व्यवहार रचाया था
बीसों नाखून खींचकर अँगुलियों को लहूलुहान बनाया था
28 सितम्बर 1991 की सुनसानी रात
उद्योगपतियों ने मिलकर उस वीर के सीने में गोली मरवाया था
उस वीर के अंत होने से, समाजसेवी और मजदूर-किसानों ने रोया था
छत्तीसगढ़ की धरती में लाल-हरा का झंडा लहराया था...

Posted on: Sep 28, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

View Older Reports »

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download