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इमा वारा पाटा अन्ना वारका पाटा...मौसमी गोंडी गीत -

ग्राम-पाठई, तहसील-पान्दुर्ना, जिला-छिन्दवाड़ा (मध्यप्रदेश) से बस्तीराम नागवंशी एक मौसमी गोंडी गीत सुना रहे है:
इमा वारा पाटा अन्ना वारका पाटा-
दिन तो पसियो-पसियो अणि रात आई लाता-
टेम-टेम टेम-टेम पिर्र अर्री लाता-
रिमझिम-रिमझिम बारिश आई लाता-
इदे मौसम उडसी ख़ुशी आई लाता-
झर-झर-झर झरना मने मोहि कीया लाता-
इमा वारा पाटा अन्ना वारका पाटा...

Posted on: Jul 18, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSHI GONDI GEET

पादय दसन एरर की पा दंता दसन एरर हंजल खोचोरो फे...धर्म गीत

ग्राम-हराडीपा,पंचायत-बरवेनगर, तहसील-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से गोलोरिया टोप्पो, शोभा कुजूर और तोसन मिंज चर्च में गाने वाला एक धर्म गीत सुना रही हैं :
पादय दसन एरर की पा दंता दसन एरर हंजल खोचोरो फे-
पा दंता दसन एरर की, पा दंता दसन एरर खांजल खोचोरो फे-
ला लारये ये सोसन गा मोदेरर के रा रा-
लार मातेसन गा मोदेरर के-
हाय रेंगय सोना लेका जिया-
हाय लारये ये सोसन गा मोदेरर के रा रा...

Posted on: Jul 14, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI

औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा हमारे गांव का नाम चितरपुर...एक गाँव की कहानी-

ग्राम-चितरपुर, पंचायत-कातिम, प्रखण्ड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से ग्रामवासी बर्थलोमी लकरा बता रहे हैं, उनके गांव में एक पौधा होता था, जिसे चितावर के नाम से जानते हैं, जो पूरे गांव में मिलता था, उसी के नाम पर गांव का नाम चितरपुर पड़ा, ये पौधा केवल गांव में ही पाया जाता है, उसे दवा के लिए भी उपयोग करते हैं, लेकिन अब उस पौधे की संख्या कम हो गई है, लोग पौधों को काटकर खेत बना चुके हैं, ये जानकारी उन्हें अपने पूर्वजो द्वारा लिखी किताब से मिली, वर्तमान में गांव में 107 घर है, इस प्रकार से चितरपुर गांव का नाम एक औषधीय पौधा चितावर के नाम पर पड़ा और आज भी इसी नाम से जाना जाता है |

Posted on: Jul 09, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSI

वनांचल स्वर : जंगल से मिलने वाले लाख, तेंदूपत्ता, महुआ से हम आदिवासी आय कमा सकते है...

ग्राम-खैरवाही, पंचायत-मयाना, तहसील-चारामा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बस्तीराम नागवंशी के साथ में गाँव के साथी है जो जंगल से जो उत्पादन होता है उसके बारे में बता रहे है कि जंगल में लाख का, तेंदूपत्ता का, महुआ का उत्पादन होता है और तेंदुपत्ता का उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है इसका सैकड़ा 120 रू में बिकता है और लाख का उत्पादन परसा में भी होता है लेकिन सबसे अच्छा कोशुम के पेड़ में होता है लाख का दाम 300-350 रू किलो बिकता है और उससे अच्छी आय भी कमा सकते है और महुआ का उपयोग दारू बनाने में किया जाता है, कुछ लोग उसको सरकारी समिति में भी बेच देते हैं. बस्तीराम नागवंशी@7440492017.

Posted on: Jan 08, 2018. Tags: BASTIRAM NAGWANSHI

तरी नारी नानी नाना रे नानी नरे सुहा हो...सुहा गीत -

ग्राम-तेलम्मा, पंचायत-भेजा, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से गाँव की दो दीदियाँ मोतिन बाई और कमला बाई एक सुहा गीत सुना रही है:
तरी नारी नानी नाना रे नानी नरे सुहा हो-
तरिव नारी नाहा नरे सुहा हो-
एक शहर में एक रानी राजा नरे सुहा हो-
वही राजा के एक जन बेटा नरे सुहा हो-
तरी नारी नानी नाना रे नानी नरे सुहा हो...

Posted on: Dec 26, 2017. Tags: BASTIRAM NAGWANSHI

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