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सरकार के लिए पिछले साल भी काम किया, इस साल भी किया पर पैसा अभी तक नहीं मिला है...

ग्राम-गोरगी, पोस्ट-जजावल, जनपद-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से शिव कुमारी बता रही है कि वर्ष 2017 में तालाब निर्माण में काम किया उसका पैसा रुका है. इस वर्ष भी सड़क बनाने में 7 सप्ताह काम किया जिसका भुगतान भी नही हुआ है| इसके लिये कई कार्यालयों के चक्कर काट चुकी है, सरपंच सचिव को बोला तो वो कहता है बैंक में देखो पैसा डाल दिया है, जब बैंक मे चेक किया तो खाते में अभी तक पैसा नहीं डाला है. इसीलिए सीजीनेट सुनने वाले साथियों से अनुरोध है कि अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा फोन कर दबाव डाले : C.E.O@9165689001, S.D.M@9165493212, सरपंच@9111234251. ग्रामीण@7909496401.

Posted on: Apr 06, 2018. Tags: BASANTI

सफाई बिना अंगना लागए गन्दा हो नहीं भावय मोला...स्वच्छता गीत -

ग्राम-घोटिया, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कौशलिया जैन, बसंती चिराम, मानबाई बघेल साफ़ सफाई से जुड़ा एक गीत सुना रही है:
सफाई बिना अंगना लागए-
गन्दा हो नहीं भावय मोला-
बिना ढके सब्जी चना दाल-
जब तेह खाना देबे-
हाथ ला साबुन से धोबे-
लईका के खावत ला देबे-
मक्खी ला भागवत रह बे-
खाना में बैठन जन देबे हो-
नहीं भावय बिना ढके सब्जी चना दाल...

Posted on: Dec 05, 2017. Tags: KOUSHLIYA BASANTI MANBAI KANKER

गुरु बिना ज्ञान, गंगा बिना तिरत...सुहा गीत -

ग्राम-घोटिया, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कौशलिया जैन, बसंती चिराम, कुंती एक सुहा गीत सुना रही है:
गुरु बिना ज्ञान गंगा बिना तिरत-
एकदशी बिन व्रत कहाँ है-
माता बिन गोद पिता बिन प्यारा-
बिना पति के सिंगार कहाँ है-
गुरु बिना ज्ञान गंगा बिना तिरत...

Posted on: Dec 03, 2017. Tags: KOUSHLIYA BASANTI KUNTI KANKER

इसी में जीना यारो इसी में मरना...देश भक्ति गीत -

ग्राम-चिन्नार, तहसील-गीदम, जिला-दन्तेवाड़ा, (छत्तीसगढ़) से गजमती साहनी, बसंती नाग और रामवती भवानी एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं:
इसी में जीना यारो इसी में मरना-
इसी में सब कुछ करना है-
हमको तुमको प्रभु ने बनाया-
प्रभु की महिमा हो-
नदी और झरनों को प्रभु ने बनाया-
आकाश और धरती को प्रभु ने बनाया...

Posted on: Nov 09, 2017. Tags: GAJMATI SAHANI BASANTI NAG RAMBATI DANTEWADA

मन करता है सूरज बनकर, आसमान में दौड़ लगाऊं...बालिका की कविता

ग्राम-समीज,ब्लॉक- आनंदपुर, जिला-पश्चिम सिंहभूम, झारखण्ड से बसंती दास एक कविता सुना रही हैं:
मन करता है सूरज बनकर, आसमान में दौड़ लगाऊं
मन करता है चंदा बनकर, सब तारों पर अकड़ दिखाऊं
मन करता है बाबा बनकर, घर में होश जमाऊं
मन करता हैं पापा बनकर, मैं भी अपनी मूंछ बढाऊं
मन करता हैं तितली बनकर, दूर-दूर उड़ता जाऊं
मन करता है कोयल बनकर, मीठे-मीठे बोल सुनाऊं
मन करता है चिड़िया बनकर, चीं-चीं-चीं शोर मचाऊं
मन करता है चरखी लेकर, पीला-लाल पतंग उडाऊं

Posted on: Feb 19, 2015. Tags: Basanti Das

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