हम तो आदिवासी मोरे भइया, जंगल के आदिवासी...

ग्राम-मरकाढाना, ब्लाक-घोड़ाडोंगरी, जिला-बैतूल, (म.प्र.) से अनीता जी एक गोंडी गीत गा रही हैं यह गीत आदिवासी समाज की जीवन पद्धति से जुड़ा है कि आदिवासी किस तरह से जंगल-पहाड़ में अपना जीवन बिताते हैं:
हम तो आदिवासी मोरे भइया, जंगल के आदिवासी
कुटकी और कोदो से कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया...
कुटकी और कोदो से करले गुजारा
कर ले गुजारा रे, कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया, बैतूल का लिखरे वाले
कोया और पैसा से कर ले गुजारा
हम तो आदिवासी मोरे भइया, बैतूल का लिखरे वाले.....

Posted on: Oct 15, 2014. Tags: Anita Betul

बोर कि अमरैयाम या अमरैयाम या आमा लगत है...गोंडी होली गीत

ग्राम आलमपुर जिला बैतूल मध्यप्रदेश से अनीता यादव जी ने एक गोंडी गीत गा रही है यह गीत होली के समय में गाया जाता है:
बोर कि अमरैयाम या अमरैयाम या आमा लगत है
आ या अमरैयाम आमा लगत है
आमा मत गायो सजन मोर डोर के अमरैयाम डोर के आमा लगत है
या अमरैयाम केला लगत है या अमरैयाम केला लगत है केला तोड़न
मती गायो सजन मोर डोर के अमरैयाम डोर के सजन मोर डोर के
या अमरैयाम संतरा लगता है या अमरैयाम संतरा लगता है संतरा
तोड़न मती मोर डोर कि अमरिया या
या अमरैया अंगूर लगत है या अमरैयाम अंगूर लगत है अंगूर
तोड़न मती मोर डोर कि अमरिया या

Posted on: Mar 04, 2014. Tags: Anita Betul Gondi

तन काया को पिंजरों बड़ो ध्यान से घडियो...एक निमाड़ी गीत

बैतूल मध्यप्रदेश से अनीता ने एक निमाड़ी गीत गाया है : ‘तन काया को पिंजरों बड़ो ग्यान से घडियो...ग्यान से घडियो रे बड़ो ध्यानसे घडियो, तन काया को पिंजरों बड़ो ध्यान से घडियो...

Posted on: Jun 25, 2013. Tags: Anita Betul