में नदी हूँ पहाड़ो से निकलकर झर-झर बहती हूं...नदी की आत्मकथा

आदित्य राज ठाकुर मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से नदी की आत्मकथा सुना रहे हैं:
में नदी हूँ पहाड़ो से निकलकर झर-झर बहती हूं-
मेरे तट पर आकर लोगो को ठंढ़क और शांति का अनुभव होता है-
मेरा रंग हल्का नीला हैं. मुझे अपने रंग पर बड़ा गर्व था-
जब मेरे भीतर चाँद और तारो की परछाई पड़ती तो-
मैं झूम उठती थी किंतु अब लोग मेरे-भीतर कूड़ा- कचरा बहाने लगे हैं-
आशा हैं कि नई पीढ़ी के बच्चे मेरे-बारे में सोचे और मेरा पहले वाला रूप लौटा लाए...

Posted on: Oct 10, 2016. Tags: Aditya Raj Thakur

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