पार्वती फूल लोढ़े जाले फुलवरिया संग में सहेलिया...भजन

ग्राम-दहेज़वार, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से आरती यादव एक भजन सुना रही है:
पार्वती फूल लोढ़े जाले फुलवरिया संग में सहेलिया-
कोई लोढे फूल पत्ती कोई लोढ़े बगिया-
कोई लोढ़ लेले धन केरा कोला संग में सहेलिया-
कोई लोढ़ लेले भांग अऊर धतुरिया संग में सहेलिया-
सरस्वती लोढ़े फुल पत्ती लक्ष्मी लोढ़े फुलबगिया-
गौरा लोढ़ लेले भांग अऊर धतुरवा संग में सहेलिया-
कोई मांगे ब्रह्मा वर कोई मांगे विष्णु वर-
कोई मांग लेले जोगी रे फकीरवा संग में सहेलिया-
सरस्वती मांगे ब्रह्मा वर लक्ष्मी मांगे विष्णु-
गौरा मांग लेले जोगी रे फकीरवा संग में सहेलिया-
पार्वती फूल लोढ़े जाले फुलवरिया संग में सहेलिया...

Posted on: Mar 18, 2017. Tags: ARTI YADAV

हंस मा सवार मईया उड़त आवे हो...सरस्वती वंदना

आरती यादव ग्राम-दहेजवार, पोस्ट-बलरामपुर,जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से एक सरस्वती वंदना सुना रही हैं:
हंस मा सवार मईया उड़त आवे हो-
गंवार लोगवा-
मईया के मरम न जान-
एक त मरम जान-
कालिके बेटवा हो पोथिया लिहले न-
मईया के चरनिया धइले खाड-
हंस मा सवार मईया उड़त आवे हो...

Posted on: Nov 25, 2016. Tags: ARTI YADAV

दुवर परखडा तू झरिया के वडिया खोलो ये माइया...देवी गीत

ग्राम-दहेजवार, पोस्ट-बलरामपुर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से आरती यादव एक देवी गीत सुना रही है:
दुवर परखडा तू झरिया के वडिया खोलो ये माइया-
सुवरिया खोलो ये माइया की वडिया ये माइया-
मैया के मांग में सेंधुरीरा सोभे-
टिकावा परमलवा वरिया के वडिया खोलो ये माइया...

Posted on: Oct 10, 2016. Tags: ARTI YADAV

दुअरे पर गंगा बहइबो, तीरथ करे बाहर न जईबो...लोकगीत

आरती यादव ग्राम-दहेजवार, जिला-बलरामपुर छत्तीसगढ़ से एक गीत सुना रही है:
दुअरे पर गंगा बहइबो-
तीरथ करे बाहर न जईबो-
अपने ससुरजी को ब्रम्हा बनईबो-
सासू को सरसती बनईबो-
अपने भसुरजी को बिष्णु बनईबो-
जेठानी को लक्ष्मी बनईबो-
अपने नंदोसी को शंकर बनईबो-
ननद के गौरा बनईबो-
अपने देवरजी को रामा बनईबो-
देवरानी को सीता बनईबो-
दुअरे पर गंगा बहइबो-
तीरथ करे बाहर न जईबो...

Posted on: Jun 24, 2016. Tags: ARTI YADAV

अंगना में तुलसी लगइहा मोरे पापा दुअरे गजलवा के फूल...विवाह गीत

ग्राम-दहजवार, जिला-बलरामपुर, छत्तीसगढ़ से कुमारी आरती यादव एक विवाह गीत प्रस्तुत कर रही हैं:
अंगना में तुलसी लगइहा मोरे पापा दुअरे गजलवा के फूल-
धाव न धूप ल न अइहन कहन दुलहा चढले गजलवा पर देख जी-
चिठिया में लिखल न दुलहा कहन दुलहा मिलिहें ससुरजी के हाथ जी-
दान-दहेज़ ससुर हम नाहीं लहबइ हम लेबइ गजला के फूल जी-
दान-दहेज़ बाबू किहा रउआ छोड़बइ ना रहई गजलवा के फूल जी...

Posted on: Apr 08, 2016. Tags: ARTI YADAV

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