लॉकडाउन के कारण राशन की समस्या हो रही है, कृपया मदद करें...

अखलेश जयसवाल वे साईंनाथ नगर पुणे में रहते है, लॉकडाउन के कारण उनको पीने की बहुत समस्या हो रही है, उनके पास राशन की समस्या है |इसलिये सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं कि खाने के लिये राशन दिलाने में मदद करें : संपर्क नंबर@8830331829. (169296) DW

Posted on: Jun 06, 2020. Tags: AKHLESH JAISWAL CORONA PROBLEM PUNE MH

हम सब सुमन एक उपवन के, एक हमारी धरती सब की...दोहा

ग्राम-केरकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (मध्यप्रदेश) से अखलेश कुसवाहा एक दोहा सुना रहे है:
हम सब सुमन एक उपवन के, एक हमारी धरती सब की-
जिसकी मिटटी में जन्मे हम, मिली हम एक ही धूप हमें है-
जिनके गये अब जल से हम पले हुये है झूम-झूमकर-
पन्नो में हम एक पवन के, हम सुमन एक उपवन के-
हम सुमन एक उपवन के, रंग रंग के रूप हमारे-
हम सब सुमन एक उपवन के, एक हमारी धरती सब की...

Posted on: Aug 01, 2018. Tags: AKHLESH KUSHWAHA POEM

हम शिवमन एक उपवन के, एक हमारी धरती सबकी...कविता

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुशवाहा एक कविता सुना रहे है:
हम शिवमन एक उपवन के एक हमारी धरती सबकी-
जिसकी मिटटी में जन्मे हम मिली एक ही धुप हमे है-
सिंचे गए एक जल से हम पले हुए है झूल झूलकर-
पल्लों में हम एक पवन के हम शिवमन एक उपवन के-
रंग-रंग के रूप हमारे अलग अलग है क्यारी क्यारी-
लेकिन हम सबसे मिल कर ही उस उपवन की शोभा सारी-
एक हमारा माली हम सब रहते नीचे एक गगन के-
हम सब शिवमन एक उपवन के सूरज एक हमारा-
जिसकी किरणे उसकी कली खिलाती एक हमारा चाँद-
चांदनी जिसकी किरणे हमे नेहलाती मिले एक से-
स्वर हमको है भौरों के मीठे गूंजन के-
हम सब शिवमन एक उपवन के-
काटो में मिलकर हम सब ने हंस हंस जीना सीखा-
एक सूत्र में बंधकर हमने हार गले के बनना सीखा...

Posted on: Jul 13, 2018. Tags: AKHLESH KUSHWAH POEM

सुन्दर और सजीला आम...बाल कविता

ग्राम-करकेटा पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुशवाहा एक बाल कविता सुना रहे है:
सुन्दर और सजीला आम-
कितनी रंग रगीला आम-
सबके मन को भाता आम-
सबका जी ललचाता आम-
जिसने सूरज चाँद बनाया-
जिसने तारो को चमकाया-
जिसने बागो को महकाया-
जिसने सारा जगत बनाया-
आओ हम उनके गीत गुनगुनाये-
उसे प्रेम से शीश झुकाए...

Posted on: Jul 07, 2018. Tags: AKHLESH KUSHWAH KAVITA

देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली...बाल कविता

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखलेश कुशवाह एक बाल कविता सुना रहे है:
देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली-
इसने ही तो कुक-कुक कर आमो में मीठी बोली-
कोयल-कोयल शब्द सुनाओ क्या संदेशा लाइ हो-
बहुत दिनों के बाद फिर इस डाली पर आई हो-
क्या गाती हो किसे बुलाती हो बतला दो कोयल रानी...

Posted on: Oct 09, 2017. Tags: AKHLESH KUSHWAHA

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