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हम मेहनत कर जीवन की हर मुश्किल को पार कर सकते हैं...कहानी-

ग्राम-केरकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उदारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुसवाहा एक प्रेरणादायक कहानी सुना रहे हैं : एक बार एक कौआ को जोर की प्यास लगी, तब आकाश में उड़ते-उड़ते उसे नीचे एक घड़ा दिखाई दिया जिसमे थोड़ा सा पानी था, जो बहोत नीचे था, लेकिन उसे अपनी प्यास बुझानी थी, फिर उसने एक तरकीब सोचा और घड़े में एक के बाद एक कंकड़ डालने शुरू किये जिससे पानी ऊपर आ गया, कौवे ने अपनी की प्यास बुझाई और आगे बढ़ चला, इससे सीख मिलती है, हम मेहनत कर जीवन की हर मुश्किल को पार कर सकते हैं |

Posted on: Jul 28, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA STORY

खाना देते हैं लेकिन खाने के बाद मिठाई नही देते...कहानी-

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुशवाहा एक कहानी सुना रहे हैं, एक बुढ़िया थी जिसके चार बेटे थे, चारो बेटे अपनी माँ खाना देते हैं लेकिन खाने के बाद मिठाई नही देते थे, तो उसने एक दिन सबको कहा जब वे मर जाएगी तो चारो तरफ रसगुल्ला रख देना, उसके बाद वह एक दिन मरने का नाटक करने लगी, तब उसके बेटो ने उसके कहे अनुसार चरो तरफ रसगुल्ले रख दिए और अर्थी उठा कर ले जाने से पहले बेले राम नाम सत्य है, तो बुढ़िया बोली रसगुल्ला बड़ा मस्त है|

Posted on: Jul 23, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA KAHANI

चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में है घर का अखबार...गीत

ग्राम-केरकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उदारीरोड (झारखण्ड) से अखिलेश कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में है घर का अखबार-
इसमें दुःख सुख की बातें हैं-
प्यार भरी इसमें सुगंध है-
कितनी ही दिन कितनी ही रातें-
तय कर आई मीलो पार-
चिट्ठी में है मन का प्यार, चिट्ठी में घर का अखबार...

Posted on: Jun 30, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA

देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली...कविता

ग्राम-केरकेट्टा, पोस्ट-जोगा, थाना-ओदारीरोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुसवाहा एक कविता सुना रहे हैं :
देखो कोयल काली है पर मीठी है इसकी बोली-
इसने ही तो कूक-कूक कर आमो में मिश्री घोली-
कोयल कोयल सच बतलाओ क्या संदेशा लाई हो-
बहोत दिनो के बाद फिर इस डाली पर आई हो-
क्या गाती हो किसे बुलाती हो, बतला दो कोयल रानी-
कैसे कैसे देख मांगती हो, क्या मेघो से पानी...

Posted on: Jun 25, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA

हरे भरे खेतो में देखो, कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका...कविता

ग्राम-करकेटा, पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड़, जिला-पलामू (झारखंड) से अखिलेश कुशवाह एक कविता सुना रहे हैं:
हरे भरे खेतो में देखो कैसा तनकर खड़ा बिज्जुका-
सिर पर काली वाली हाड़ी है चुने का टिक्का-
कुर्ता टीला फटा चिथडा तनिक ना इसे सलीका-
हांथ पांव लकड़ी के इसके पर मन का है कड़ा बिज्जुका-
देख बिज्जुकी मिल गाए भैस और साड़ भड़कते – पास ना फटे कोई पक्षी सूरत देख हडकते...

Posted on: Feb 11, 2018. Tags: AKHILESH KUSWAHA

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