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जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना, और सुनी है बाराते दारू...बुन्देलखंडी लोकगीत

ग्राम-गोण, पोस्ट-थनरा, थाना-दिनारा, जिला-शिवपुरी (छत्तीसगढ़) से अखिलेश कुमार पारश एक बुन्देलखंडी लोकगीत सुना रहे है:
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
न्याव्ह कोट बिन, चुनर गोट बिन, दूल्हा कोट बिना-
कि मझली काकी वोट न डाले, 100 के नोट बिना-
बिन चोर के बिना, दारू होर के बिना-
और सुनी है बाराते दारू, कोर के बिना-
जंगल मोर के बिना, कि दारू कोर के बिना...

Posted on: May 25, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ...सरस्वती वंदना

जिला-शिवपुरी, (मध्यप्रदेश) से अखिलेश कुमार पारश सरस्वती वंदना गीत सुना रहे है:
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ-
तू शल की देवी, ये संगीत तुझसे, हर शब्द तेरा हर गीत तुझसे-
हम अकेले हम है अधूरे, विद्द्या का हमको भी अधिकार दे माँ-
मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी, वेदों की भाषा, पुराणों की वाणी-
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने-
तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ, हे शारदे माँ-
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ...

Posted on: May 07, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS

दान अवसर आज का है, स्वागतम शुभ आगमन...स्वागत गीत

ग्राम-कुंड, पोस्ट-फंदरा, थाना-दिनारा, तहसील-करैरा, जिला-शिवपुरी (मध्यप्रदेश) से अखिलेश कुमार पारस एक स्वागत गीत सुना रहे हैं :
दान अवसर आज का है, स्वागतम शुभ आगमन-
आप आकर हैं पधारे, देश के सेवी सदन-
हर्ष से हृदय भरा है, दान अवसर आज का है, स्वागतम शुभ आगमन-
हम है बालक छोटे-छोटे और हैं नादान हम-
सेज सहना चाहते हैं स्वागतम शुभ आगमन-
प्रकृति के इस नए जमत में और है नादान हम...

Posted on: May 07, 2018. Tags: AKHILESH KUMAR PARAS

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