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जो भी कहूँगा सच कहूँगा, नए साल की कसम...हास्य कविता -

ग्राम-ममढा, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से आकाश सिंह ठाकुर एक हास्य कविता सुना रहे है:
जो भी कहूँगा सच कहूँगा, नए साल की कसम-
ताज़ा बना हूँ दामाद, ससुराल की कसम-
महगाई का मारा हूँ, रोटी दाल की कसम-
मै आम आदमी हूँ, केजरीवाल की कसम-
हमारे मित्र लगातार बीस साल से-
खाने की प्रतियोगिता में प्रथम आ रहे है-
बीस लोगो का खाना अकेले ही पचा रहे है-
मैंने उनसे कहा मित्र आप-
खाने के दौर में आप आगे जा रहे है-
हमारी बात को सुनकर वे उदास हो गए...

Posted on: Jan 24, 2018. Tags: AKASH SINGH THAKUR

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