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वनांचल स्वर : यहां ग्रामवासी तेंदूपत्ता, चार, महुआ, हर्रा, बेहडा बेचकर अपना जीवन यापन करते है...

ग्राम-घोडाखुर्री, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से अगनुराम खड़हे स्थानीय माध्यमिक शाला के प्रधान अध्यापक है. वे बता रहे हैं कि स्कूल की शुरुवात उनके ही द्वारा 1983 में हुई. घोडाकुर्री गाँव का नाम क्यों पड़ा उसके बारे में जानकारी दे रहे है. बुजुर्ग लोगो के अनुसार यहाँ पर घोडा के पैर का एक चिन्ह था उसके कारण इस गाँव का नाम घोडाकुर्री नाम पड़ा है अभी वर्तमान में वो चिन्ह नहीं है मिट गया है. गाँव की जनसँख्या लगभग 350 है. पूरा गोंड आदिवासी गाँव है और उनका जीवन यापन का साधन खेती बाड़ी और वनोपज है | वनोपज में तेंदूपत्ता, चार, महुआ, हर्रा, बेहडा, इस सबको समय-समय पर सीजन के आधार पर एकत्रित करते है उसको बेचकर अपना जीवन यापन करते है

Posted on: Dec 17, 2017. Tags: AGNURAM KHADHE VANANCHAL SWARA

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