कैसे गिराये कोई तुम्हे जब बुलंद हो हौसले...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
कैसे गिराये कोई तुम्हे जब हो तुम्हारे बुलंद हौसले-
एक एक कदम आगे बढ़े तो कैसे न मिले मंजिले-
दो हाथ दो पाँव तैयार हो कैसे न मुस्किले टले-
प्यार जो हो हर एक से तो दिल कैसे नफरत पले-
रुकने का तो सवाल ही नहीं जब हम घर से निकल पड़े-
क्या दुश्मन क्या दोस्त हमारे राह में जब चल पड़े-
कैसे गिराये कोई तुम्हे जब बुलंद हो हौसले... (AR)

Posted on: Sep 25, 2020. Tags: POEM