जेठ के महिना मा कैसन तरस खाबे आम...छत्तीसगढ़ी कविता-

ग्राम-तमनार , जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं:
पंखा धुंका थे बाबा कही ये का होगे राम-
जेठ के महिना मा कैसन तरस खाबे आम-
तरे माजनिया ला देखो नीचत बेमयाय हे-
अंगत के पांव जैसन घलो उबजाये हे-
का बताओं ओकरे बजत हबे डंका-
अइसन लगा थे अइसन लेसाबा थे लंका...(AR)

Posted on: Jun 01, 2021. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

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