भाटा केरा के वजा, आलू बरी मुनगा के झोर...छत्तीसगढ़ी कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं:
भाटा केरा के वजा-
आलू बरी मुनगा के झोर-
बूढी दाई बुढा बाबा-
खोजथे मुनगा ला चिचोर-
दांत नई आय एकोठन-
मुनगा भाजी घलो कैसे खाहीं... (AR)

Posted on: Jun 16, 2020. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI POEM