ये कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे...कविता-

ग्राम-रक्सा, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से दिव्या जोगी एक कविता सुना रही हैं:
ये कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे-
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे-
ले देती यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली-
किसी तरह नीची हो जाती ये कदम्ब की डाली-
तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता-
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता...

Posted on: Mar 30, 2020. Tags: ANUPPUR DIVYA JOGI MP POEM

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