कविता : शीत लिए आयी हवा थर थर कापे रात...

ग्राम पंचायत-जमुड़ी, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से चंद्रभान सिंह मार्को एक कविता सुना रहें है:
शीत लिए आयी हवा थर थर कापे रात-
सूरज चचा आइयें लेकर नवल प्रभात-
धुप शीत में आ गयी जब जब सर के पास-
माँ जैसी ममता लागें पापा का आभास-
कुहरा आकर द्वार पर अड़का रहा विकार-
कहता कुण्डी खोल दो बहुत लग रही जाड़-
कुहरे ने जब कह दिए, कड़वे से कुछ बोल-
गोला सूरज का हुआ, आसमान से गोल-
सूरज जब ढकने लगे जब अपना स्वंय शारीर-
पीड़ित करते शरद ऋतू, किसे सुनाएं पीर-
धुप ठण्ड में छत चढ़ी, खूब रही थी खेल-
चाह भरी शीतल हवा, निचे रही धाकेल-
सूरज जब करता नही, आसमान में सैर-
तभी कोहरा तानता चादर बाहर पैर-
ओढ़े हुए राज्जैया सोते रहे आमिर-
सर्दी अश्रु बाह रही, दे रही गरीब को पीर-
कुहरा में मुस्तैद, घर में जला अलाव-
ठंडा पड़ा अलाव है, बर्फ हो रही देर...

Posted on: Nov 26, 2019. Tags: ANUPPUR MP CHANDRABHAN SINGH MARKO SONG

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