अतिथि घर का वैभव है, प्रेम ही घर की प्रतिष्ठा है...कविता-

ग्राम पंचायत-पिंडरुखी, विकासखण्ड-बजाक, जिला-डिंडोरी (मध्यप्रदेश) से भारद्वाज मानिकपुरी एक कविता सुना रहे हैं:
अतिथि घर का वैभव है-
प्रेम ही घर की प्रतिष्ठा है-
वस्तु ही घर की शोभा है-
समाधान ही घर का सुख है-
सदाचार ही घर की शरुआत है-
ऐसे घर में सदा प्रभू का वास है...

Posted on: Jun 14, 2019. Tags: DINDORI MITHLESH MANIKPURI MP POEM

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