जिससे आज और अभी कुछ भी ना करना पड़े...एक कविता

महान विचार बदल जाते हैं
सस्ते चित्रों में
भगत सिंह बदल जाता है
कार के पिछले शीशे पर चिपकाने
के एक स्टीकर में

उसकी सारी हिम्मत
और प्रेम
बदल दिया जाता है
एक पिस्तौलधारी
लड़के के कलेंडर में

गांधी बदल जाता है
एक खादी के कुर्ते में
या चरखे में
पद में
या सम्मान दिलाने वाले एक साधन में

जीसस बदल जाता है
एक शानदार चर्च में लगे सोने के
क्रोस में

मुहम्मद बदल जाता है
बकरे की गर्दन काटने की रस्म में

सदियों का सारा परम्परागत ज्ञान बदल जाता है
कुछ कर्म कांडों में

मनुष्य के मनुष्य होने के लिये बनाये गये सारे नियम बदल जाते हैं
एक साम्प्रदायिक नाम में
और उसका रोज़मर्रा के जीवन में कोई भी दखल
इस चालाकी से समाप्त कर दिया जाता है
कि इंसान उनसे बच कर फिर से
लालच और जानवराना व्यवहार के साथ जीता रहता है
सारे पर्यावरण और समाज के साथ दुश्मनों की तरह

आपका सारा ज्ञान बदल जाता है
आपको ज्यादा ढोंगी
बनाने में
जिससे आप
अपने
स्वार्थी
और मतलबी व्यवहार को
अपने सभ्य होने के बहाने में
छिपा लेते हैं

आपके चारों तरफ
मेहनत करने वाले जब
भूखे घुमते हैं
और आप
आराम से बैठे बैठे
अमीर बने होते हैं
तब आप बातें करने लगते हैं
मार्क्स की
जिससे
आज और अभी कुछ भी ना करना पड़े

Posted on: Nov 07, 2012. Tags: Himanshu Kumar

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